बिहार: हेल्थ सिस्टम की हकीकत! गर्भ में मर गया था बच्चा पर डॉक्टरों ने मरीज को छूने से भी कर दिया इनकार

[ad_1]

बिहार: हेल्थ सिस्टम की हकीकत! गर्भ में मर गया था बच्चा पर डॉक्टरों ने मरीज को छूने से भी कर दिया इनकार

गया के प्रभावती व जय प्रकाश नारायण अस्पताल में अव्यवस्था का आलाम

रेखा देवी भी प्रभावती अस्पताल में भर्ती के लिए भर्ती हुई थीं। बताया जा रहा है कि तब उनका बच्चा गर्भ में ही मर गया था। डॉ ने इसे भी खून की कमी बताकर रेफर कर दिया। परिजन खून देने के लिए तैयार थे पर डॉ। ऑपरेशन कर मृत बच्चे को निकालने के लिए तैयार नहीं हुए और उसे जबरदस्ती रेफर कर दिया।

गया। कोरोनावायरस के संक्रमण (कोरोना वायरस संक्रमण) के लक्षणों के बीच एक ओर जहां डॉक्टरों की त्याग भावना हमें देखने को मिल रही हैं। आम से लेकर खास, सभी उनके लिए एक स्वर से प्रशंसा कर रहे हैं। वहीं, इसी दौर में कुछ ऐसे भी हैं जो इस पवित्र पेशे की साख पर बट्टा लगा रहे हैं। विभिन्‍न परिवर्तन शतरों पर इनकी लापरवाही व भावनाहीनता सामने आ रही है। बात मोक्ष नगरी गया की करते हैं। यहां अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल (ANMMCH) को राज्य सरकार ने कोरोना के इलाज के लिए को लाभांश अस्पताल घोषित कर दिया है। इस नई व्यवस्था के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एएनएमसीएच के इमरजेंसी और अन्य बीमारी के इलाज के लिए जय प्रकाश नारायण अस्पताल और प्रभावती अस्पताल कोंजित किया है। इन दोनों अस्पतालों में घोर लापरवाही दिख रही है।

अधिकांश रोगियों को रेफर किया जा रहा है

प्रभावती अस्पताल अंग्रेज के शासन के दौरान महिला अस्पताल के रूप में शुरू की गयी थी। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना को लेकर की गयी नई व्यवस्था में स्त्री रोग और शिशु रोग के मरीज के इलाज की व्यवस्था यहां की है। जिसके लिए एएनएमएसीएच के डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति भी यहां की गयी है पर यहां ज्यादातर मरीजों का इलाज के बजाय सिर्फ रेफर किया जा रहा है।

मरीज को छूने के लिए भी तैयार नहीं हुएजिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर नक्सल प्रभावित डुमरिया से अपनी पत्नी उर्मिला देवी की प्राप्ति के लिए आये राव ने बताया कि मरीज को खून की कमी बताकर पटना रेफर कर दिया गया। वे लोग ब्लड देने के लिए तैयार थे पर डॉक्टर मरीज को छूने को तैयार नहीं हुए। जबकि उनका मरीज दर्द से कराह रहा था।

न्यूज 18 ने पूछा तो भाग खड़े हुए डॉ

इस संबंध में प्रतिनियुक्त डॉ वजीउद्दीन से न्यूज 18 की टीम ने बात करने की कोशिश की तो वे लेबर रूम की तरफ भाग खड़े हुए और अंत में परिजन रोते हुए उर्मिला देवी को दूसरे अस्पताल लेकर चले गए।

गर्भ में ही मर गई थी बच्चा पर कर दिया रेफर

वहीं, एक दूसरी महिला रेखा देवी भी यहां ऑफर के लिए यहां भर्ती हुई। बताया जा रहा है कि उसका बच्चा गर्भ में ही मर गया था। डॉ ने इसे भी खून की कमी बताकर रेफर कर दिया। परिजन खून देने के लिए तैयार थे पर डॉ। ऑपरेशन कर मृत बच्चे को निकालने के लिए तैयार नहीं हुए और उसे जबरदस्ती रेफर कर दिया। यही नहीं दूसरे अस्पताल जाने के लिए एबुलेंस तक मुहैया नहीं कराया गया।

अस्पताल प्रबंधन ने दी सफाई

अपने मृत बच्चे को पेट में लेकर दर्द से कराहती महिला रेखा देवी औक से दूसरे अस्पताल चली गयी। एबुलेंस नहीं मिलने की शिकायत पर अस्पताल के प्रबंधक विमलेश कुमार ने बताया कि मरीज के परिजन को एबुलेंस के लिए 15 मिनिट इंतजार करने को कहा गया था। क्योकि अस्पताल का एंबुलेस दूसरे मरीज को पहुंचाने गया था, मरीज के परिजन हड़बड़ी में औक से निकल गए।

अस्पताल को धर्मशाला नहीं बनाना चाहते डॉ

प्रभावती अस्पताल की तरह ही जय प्रकाश नारायण अस्पताल का भी हाल है। दो दिन पहले यहां मोहड़ा से एक कुष्ट रोगी गंभीर स्थिति में इलाज के लिए आया था। यहां के डॉक्टरों ने इलाज करने से मना कर वापस लौटा दिया।

इस संबंध में अस्पताल के उपाधीक्षक चेंद्रशेखर प्रसाद सिंह ने न्यूज 18 से बात करते हुए कहा कि उनके यहां चर्म रोग के लक्षण हैं। इसलिए वे इस तरह के रोगी को भर्ती करके अस्पताल को धर्मशाला नहीं बना सकते हैं। जबकि हकीकत ये है कि एएनएमएमसीएच को कोरोना अस्पताल के रूप में रूपत किए जाने के बाद वहां के कई विशेषज्ञ डॉक्टरों को जेपीएन में प्रतिनियुक्त किया गया है।

आला अधिकारियों की भी नहीं सुनते डॉ

दोनों अस्पतालों की व्यवस्था को ठीक करने के लिए डीएम और सिविल सर्जन भी कई बार दौरा कर चुके हैं। डॉक्टरों और स्वास्थयंत्रियों को लापरवाही की शिकायत पर चेतावनी भी दे चुकें हैं पर ऐसा लगता है कि ये दोनों अस्पताल में तैनात डॉक्टर मरीजों का इलाज करने के बजाय किसी न किसी कारण से रेफर कर दे रहें हैं जिससे गरीब मरीज और उनके परिजन को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। गिर रहा है।

जहानाबाद की घटना से भी नहीं लिया गया

हाल में जहानाबाद के सदर अस्सपताल (जहानाबाद सदर अस्पताल) प्रबंधन के एएरेन्स (एम्बुलेंस) नहीं दिए जाने के कारण तीन साल के मासूम (तीन साल के बच्चे) ने मां की गोद में ही दम तोड़ दिया था। मामले ने तूल पकड़ा और अस्प्रताल प्रबंधक को निलंबित कर दिया गया और साथ ही दो डॉक्टेरों, चार नर्सों के चिआलाफ की कार्रवाई की सिफारिश की गई। लेकिन ऐसा लगता है कि डॉक्टरी के इस पेशे में कुछ ऐसे लोग भी हैं जिनमें संवेदनशीलता ही नहीं है।

ये भी पढ़ें

News18 हिंदी सबसे पहले हिंदी समाचार हमारे लिए पढ़ना यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर । फोल्ट्स। देखिए गया से संलग्न लेटेस्ट समाचार।

प्रथम प्रकाशित: 15 अप्रैल, 2020, 2:51 अपराह्न IST


इस दिवाली बंपर अधिसूचना
फेस्टिव सीजन 75% की एक्स्ट्रा छूट। केवल 289 में एक साल के लिए सब्सक्राइब करें करें मनी कंट्रोल प्रो।कोड कोड: DIWALI ऑफ़र: 10 नवंबर, 2019 तक

->



[ad_2]

Source link